मालवा और चंबल का प्रवेश द्वार। एक ऐसी धरा जहाँ इतिहास की गहराई, असीम आस्था, औद्योगिक प्रगति और न्यायपालिका के दिग्गजों का अद्भुत संगम होता है।
जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के रूप में, वे राजस्व, विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून-व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए जिम्मेदार हैं।
जिले में कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और अपराध नियंत्रण की पूरी कमान पुलिस अधीक्षक के हाथों में है।
2024 के लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले श्री सिंधिया वर्तमान में भारत सरकार में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं। क्षेत्र के विकास, विशेषकर रेलवे और विमानन सुविधाओं के विस्तार में इनका अहम योगदान है।
गुना विधानसभा क्षेत्र जिले का मुख्य शहरी केंद्र है। महिलाओं की सुरक्षा और सुदृढ़ सड़कों के निर्माण के लिए इनका कार्यकाल महत्वपूर्ण माना जाता है।
बमोरी विधानसभा क्षेत्र गुना जिले का एक प्रमुख ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्र है। यह क्षेत्र कृषि उत्पादकता और ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
राघौगढ़ ऐतिहासिक दृष्टिकोण से राजघराने का क्षेत्र रहा है। मध्य प्रदेश सरकार में वे पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं और अपने क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए जाने जाते हैं।
चाचौड़ा विधानसभा क्षेत्र राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है। वे महिलाओं के सशक्तिकरण और क्षेत्रीय विकास के मुद्दों पर हमेशा मुखर रहती हैं।
गुना जिले का इतिहास सदियों पुराना और अत्यंत गौरवशाली रहा है। प्राचीन काल में यह भू-भाग उज्जैन के शक्तिशाली अवंति साम्राज्य (Avanti Kingdom) का एक अभिन्न अंग था, जिसकी स्थापना चंद्र प्रद्योत महाशिवन ने की थी। यह क्षेत्र मौर्य, गुप्त और हर्षवर्धन जैसे प्रतापी साम्राज्यों के उत्थान और पतन का साक्षी रहा है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इसका आधुनिक नाम 'ग्वालियर यूनाइटेड नेशन आर्मी' (GUNA) से प्रेरित माना जाता है, क्योंकि सिंधिया राजवंश के शासनकाल में यहाँ ग्वालियर राज्य की एक विशाल और रणनीतिक सैन्य छावनी स्थापित थी। 18वीं शताब्दी के दौरान, मराठा सरदार रामराव फाल्के ने इस क्षेत्र पर अपना आधिपत्य स्थापित किया और बाद में यह पूरी तरह से ग्वालियर के सिंधिया राजघराने के अधीन आ गया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, विशेषकर 1857 की क्रांति में इस क्षेत्र की भूमिका ऐतिहासिक रही है। महान स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे ने गुना और इसके आसपास के घने जंगलों को अपनी शरणस्थली बनाया और यहीं से अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध का सफल संचालन किया।
मालवा के पठार और चंबल की घाटियों के बीच स्थित, गुना जिला अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है। 24.65° उत्तरी अक्षांश और 77.32° पूर्वी देशांतर पर स्थित इस जिले की सीमाएं अत्यंत रणनीतिक हैं। इसके उत्तर-पूर्व में शिवपुरी, पूर्व में अशोकनगर, दक्षिण-पूर्व में विदिशा, दक्षिण-पश्चिम में राजगढ़ तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान के झालावाड़ और बारां जिले स्थित हैं। जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली पारबती नदी इसकी पश्चिमी सीमा का निर्माण करती है, जबकि सिंध नदी जिले के पूर्वी हिस्से को सिंचित करती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, गुना जिले की कुल जनसंख्या 1,241,519 है। जिले का जनसंख्या घनत्व 194 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है और साक्षरता दर 63.23% के आसपास है। यहाँ की एक बड़ी आबादी ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों में निवास करती है। सहरिया (Saharia) और भील जैसी जनजातियाँ आज भी जंगलों और ग्रामीण इलाकों में अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान, लोकगीतों और पारंपरिक जीवनशैली को सहेजे हुए हैं।
गुना की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि और उससे जुड़े उद्योग हैं। पूरे एशिया महाद्वीप में गुना की कुंभराज मंडी अपनी विश्वस्तरीय धनिया (Coriander) की पैदावार और व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ का धनिया अपनी तीव्र सुगंध और गुणवत्ता के कारण खाड़ी देशों (Middle East) तक निर्यात किया जाता है। इसके अतिरिक्त, जिले की काली और लाल मिट्टी में सोयाबीन, गेहूं, चना, और सरसों का भारी उत्पादन होता है। औद्योगिक मोर्चे पर, जिले का विजयपुर (Vijaipur) क्षेत्र भारत के नक्शे पर एक चमकता हुआ सितारा है। यहाँ National Fertilizers Limited (NFL) का विशाल संयंत्र स्थापित है, जो देश भर के किसानों की मांग पूरी करने के लिए 'किसान यूरिया' का उत्पादन करता है। इसी के निकट GAIL (Gas Authority of India Limited) का देश का सबसे बड़ा गैस कम्प्रेसर और प्रोसेसिंग प्लांट स्थित है। यह संयंत्र भारत की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण HBJ (हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर) क्रॉस-कंट्री गैस पाइपलाइन को संचालित करता है, जिससे देश के कई राज्यों में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
शिक्षा के क्षेत्र में गुना जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उच्च तकनीकी और इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान करने के लिए राघौगढ़ क्षेत्र में Jaypee University of Engineering and Technology (JUET) का विशाल परिसर स्थित है, जो छात्रों को विश्वस्तरीय तकनीकी ज्ञान प्रदान कर रहा है। हाल ही में, जिले की उच्च शिक्षा को एक नई दिशा देने के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इस नए और आधुनिक विश्वविद्यालय से गुना और आसपास के जिलों के शासकीय व निजी महाविद्यालयों को संबद्ध किया गया है। इसने न केवल छात्रों की लंबी यात्राओं पर रोक लगाई है, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त करने का एक शानदार मंच तैयार किया है। यह विश्वविद्यालय क्षेत्र के युवाओं के शैक्षणिक और बौद्धिक सशक्तिकरण का नया केंद्र बन चुका है।
पर्यटन, इतिहास और धार्मिक आस्था के दृष्टिकोण से गुना एक बेहद आकर्षक गंतव्य है। यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थल इस प्रकार हैं: 1. बजरंगढ़ का किला (झारकोन दुर्ग): यह भव्य किला अपने ऐतिहासिक गौरव और अदम्य शौर्य के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण लगभग 1600 ईस्वी के आसपास नंदवंशी (यदुवंशी) अहीर राजा, ठाकुर जय नारायण सिंह यदुवंशी द्वारा कराया गया था। किले के प्रांगण में प्राचीन जैन अतिशय क्षेत्र (शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर) और भगवान राम का मंदिर भी स्थित है, जो इस स्थान को ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही रूप में महत्वपूर्ण बनाते हैं। 2. टेकरी सरकार (हनुमान टेकरी): गुना शहर के ठीक बीच में एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह भगवान हनुमान का अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू सिद्ध मंदिर है। यह संपूर्ण जिले की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। 3. गोपी कृष्ण सागर डैम: प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली से घिरा यह एक विशाल जलाशय है। यह नौका विहार (Boating) और परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए पर्यटकों की पहली पसंद है। 4. बीसभुजा देवी मंदिर: यह एक अति-चमत्कारी और जाग्रत शक्तिपीठ है, जहाँ माता दुर्गा की 20 भुजाओं वाली अत्यंत दुर्लभ और मनमोहक प्रतिमा स्थापित है। नवरात्र के समय यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है। 5. निहाल देवी मंदिर: घने जंगलों और सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर माता निहाल देवी को समर्पित है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरा यह स्थान पर्यटकों और श्रद्धालुओं को असीम शांति और ध्यान का वातावरण प्रदान करता है।
रमेश चंद्र लाहोटी गुना से आते हैं। उन्होंने भारत के 35वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में सर्वोच्च पद संभाला। गुना के जिला न्यायालय से अपने करियर की शुरुआत कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर शहर का गौरव बढ़ाया।
ग्वालियर राजघराने की महारानी और 'राजमाता' के नाम से प्रसिद्ध, विजयाराजे सिंधिया गुना-ग्वालियर क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली राजनेताओं में से एक थीं। उन्होंने गुना का कई बार संसद में प्रतिनिधित्व किया।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह राघोगढ़ (गुना) से आते हैं। उनका राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बहुत गहरा प्रभाव रहा है।
स्वतंत्रता पूर्व मध्य भारत की राजनीति के कद्दावर नेता। वे अविभाजित मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और राज्य के प्रमुख राजनेता रहे, जिनका गुना से गहरा जुड़ाव था।
जस्टिस आर.सी. लाहोटी के छोटे भाई, के.के. लाहोटी ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अपनी शानदार सेवाएं दी हैं।
'संजू भैया' के नाम से प्रसिद्ध, बमोरी (गुना) क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले महेंद्र सिंह सिसोदिया मध्य प्रदेश शासन में कैबिनेट मंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) के रूप में कार्य कर चुके हैं।
दिग्विजय सिंह के सुपुत्र व राघोगढ़ से विधायक, जयवर्द्धन सिंह मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री (नगरीय विकास एवं आवास विभाग) रह चुके हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मूल सिंह ने मध्य प्रदेश की पूर्व सरकारों में मंत्री पद का कार्यभार संभाला और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।